तू
तू ही दूर तू ही करीब है
तेरा साथ कितना अजीब है
मेरी दोस्ती भी तुझी से हो
क्योंकि तू ही मेरा रकीब है
है दुआ तू मुझको नसीब हो
फिर अपना अपना नसीब है
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फिर तेरी याद

फिर से आई तेरी याद है
ऐ खुदा फिर फ़रियाद है
सावन आया बादल छा गए
फिर से बरसी तेरी याद है
ना मिलोगे तुम तो क्या हुआ
संग मेरे जो अब तेरी याद है
इस जहाँ में सब मुझसे दूर है
सब कुछ मेरा बस तेरी याद है
चाहे ढूंढ ले अब तू सारा जहाँ
ना मिलेगा जैसा ये "नाशाद" है
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