मंगलवार, 23 मार्च 2010

वो नहीं मिला 

यूँ तो जिंदगी में हमें बहुत कुछ मिला
मगर जो चाहा था हमें वो नहीं मिला

खोजते रहे मगर मंजिल का रास्ता नहीं मिला
जीवन भर यही  बस  चलता  रहा  सिलसिला

ना कह सकता हूँ खुद से कि हमें मौका नहीं मिला
अपनी बात कहने  का  हमें हौसला  ही नहीं मिला

किस्मत का साथ तो "नाशाद" हमें हर वक्त ही मिला
खुद ही ना दे सके अपना साथ अब किससे करें गिला


2 टिप्‍पणियां:

pankaj ने कहा…

Truth of Life.

I love your feelings bhaisaab. Main aapki bheji hui sabhi kavitaye gehrai se padhta hu.

Thanx for sending me these soulful poems.

nilimagraj ने कहा…

mila to bas ek hosala mila
dusarese kya kare gila
uhi chalega ab silsila
kyonki kamal kichad mehi tha khila
unse ab kya kare sila
jab jindgi se jeet ke tu na mila