शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

ना तुम जानो ना मैं जानू

कैसे आते हो तुम मेरे ख्वाबों में 
ना तुम जानो ना मैं जानू 
कैसे बस गए हो तुम मेरे दिल में 
ना तुम जानो ना मैं जानू 

किस तरह बंध गया ये बंधन
ना तुम जानो ना मैं जानू
किस तरह हम हार गए दिल
ना तुम जानो ना मैं जानू

किस तरह मिल गई निगाहें
ना तुम जानो ना मैं जानू
किस तरह मिल गई दो राहें
ना तुम जानो ना मैं जानू

कैसे थामा मैंने तेरा आँचल
ना तुम जानो ना मैं जानू
कैसे माना तुमने मुझे साजन
ना तुम जानो ना मैं जानू

कैसे धूप लगने लगी है छाँव
ना तुम जानो ना मैं जानू
कैसे हिज्र भी लगने लगा मिलन
ना तुम जानो ना मैं जानू 


8 टिप्‍पणियां:

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

बहुत खूब ......!!

मत पूछ के तेरा इन्तजार kitna है
तेरा ही अक्स है in हवाओं में
तू ही है इन फ़िजाओं में ......

Suman ने कहा…

nice

awadhesh pratap ने कहा…

पहली नज़र में हुई मौहब्बत का गीत है. बहुत ही सुन्दर लय है शब्दों में. एक और बेहद सुन्दर प्रेम गीत.

Gurminder Kaur ने कहा…

कितना अच्छा गीत बन गया है ये. आप है ना ऐसे ही गीत लिखा करो. आप ग़ज़लों में दिल को बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देते हो. वैसे हर मूड का पढना चाहिये. आपको बहुत बहुत शुभ कामनाएं.

sikandar ने कहा…

एक तरफ है ग़मों का दरिया
दूसरी तरफ खुशीयों का नज़ारा
क्या बात है .पहलगाम की वादीयों में शम्मी कपूर और आशा पारेख ये गाना गा रहे हैं ऐसा लग रहा है.

Neelam ने कहा…

कैसे थामा मैंने तेरा आँचल
ना तुम जानो ना मैं जानू
कैसे माना तुमने मुझे साजन
ना तुम जानो ना मैं जानू

बहुत सुन्दर और मनभावन प्रेमगीत.

Neelam ने कहा…

बहुत सुन्दर और मनभावन प्रेमगीत.

कैसे थामा मैंने तेरा आँचल
ना तुम जानो ना मैं जानू
कैसे माना तुमने मुझे साजन
ना तुम जानो ना मैं जानू

Rani ने कहा…

सिकंदर साहब ने बहुत सही लिखा है की काश्मीर की वादियों में जैसे कोई गाना फिल्माया जा रहा हो. ये गीत तो बहुत अच्छा बन पड़ा है. बधाई नरेशजी.