सोमवार, 12 अप्रैल 2010


बेटीयाँ 

हर घर की रौनक होती है बेटीयाँ
हर घर की  शान  होती है बेटीयाँ

खुद का घर छोड़कर
सभी अपनों को छोड़कर
दूसरों के घरों को
बसाती संभालती है बेटीयाँ





अपने आंसुओं को
अपनी आरजुओं को
मन ही मन में हरदम
दफ़न करती है बेटीयाँ

भेदभाव देखती है
अत्याचार सहती है
फिर भी चेहरे पर शिकन
नहीं आने देती है बेटीयाँ

सबके गम सहती है
सबके दुःख हरती है
खुद के लिए कभी भी
कुछ नहीं मांगती है बेटीयाँ




हर किसी को चाहिये
इन्हें घर की इज्जत समझें
इन्हें खुदा का वरदान समझें
बहुत ही किस्मत वालों को
मिलती है बेटीयाँ



कितना सूनापन लगता है
घर अधुरा सा लगता है
उन्हें हर कोई जाकर पूछे
जिनके नहीं होती बेटीयाँ


हर घर की रौनक होती है बेटीयाँ 
हर घर की  शान  होती है बेटीयाँ 


11 टिप्‍पणियां:

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

अगर यही बात सब लोग समझ जाये तो ना जाने कितनी ही लड़कियां आज शिक्षा,स्वास्थय आदि से वंचित न रहे ...क्या पता इनमे से ही हमें कितनी और इंदिरा,कल्पना चावला मिल जाये....

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

मन मुदित हो गया!
--
माँग नहीं सकता न, प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे!
--
संपादक : सरस पायस

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

बेटियों को समर्पित एक कविता -
--
वसंत आता है -
जब घर में जन्म लेती है बिटिया!

PRAN SHARMA ने कहा…

KITNA SOONAPAN LAGTA HAI
GHAR ADHOORA SAA LAGTA HAI
UNHEN HAR KOEE POOCHHE JAAKAR
JINKE GHAR NAHIN HOTEE BETIYA
NARESH JEE,BAHUT KHOOB! AAPKEE
KAVITA NE MUN MOH LIYA HAI.BADHAAEE

awadhesh pratap ने कहा…

आपने बिलकुल सत्य लिखा है. इक्कीसवीं शताब्दी में भी हमारे देश में लोग बेटीयों को हिकारत भारी नज़र से देखते हैं. ये बड़े ही शर्म की बात है. मेरे तीन छोटी बहनें है. जब तीनों मेरे हाथ में रखी बांधती है तो ऐसे लगता है कि अब मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. उनकी आंखों से जो प्यार बरसता है वो रेगिस्तान के सावन से भी सुहावना लगता है. आपको बहुत बहुत बधाई. ह्रदय की गहराइयों से बधाई.

Gurminder Kaur ने कहा…

पढ़कर मैं अपने आंसुओं को ना रोक सकी. आपने बेटीयों का जो चरित्र चित्रण किया है वो बहुत भावुक लगा.आपके दिल में सचमुच बेटीयों के लिए जो प्यार है ; वो खुलकर सामने आ गया है. बेटीयाँ होती ही ऐसी है. आप तो है ना एकदम लाजवाब हो.

Neelam ने कहा…

बेटी एक घर के लिए / पुरे परिवार के लिए क्या होती है मैं बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ. मैं अपने तायाजी , पापा और चाचा की इकलौती बेटी हूँ. मेरे कुल पांच भाई है. सब लोग मुझे इतना प्यार देते हैं कि ये सोच कर ही दिल दहल उठता है कि शादी के बाद मैं इन सबके बिना कैसे रह पाऊँगी. लेकिन आपकी इन पंक्तियों ने मेरा हौसला बड़ा दिया है

खुद का घर छोड़कर
सभी अपनों को छोड़कर
दूसरों के घरों को
बसाती संभालती है बेटीयाँ

मैं आपकी इस कविता को कभी नहीं भुला पाऊँगी नरेशजी. आज आपने अपना एक और नया चेहरा दिखाया है. एक ऐसे बाप का चेहरा जो घर परिवार को बेटीयों के बिना अधुरा मानता है.

बेनामी ने कहा…

मेरे मित्र सूर्य विक्रमजीत ने आपकी कवितायें और गज़लें मुझे कई दफा सुनाई है. मैं आपकी लेखनी का कायल हूँ. आज पहली बार मैंने खुद ने आपकी कविता पढ़ी और वो भी बेटीयाँ. दिल की आख़री गहराई तक एक एक शब्द उतर गया लेकिन फिर भी दिल की गहराई कम महसूस हुई आपकी भाषा और विचारों के लिए. आप बस लिखते रहीये नरेश भैय्या . आप वाकई बहुत कमाल का लिखते हैं. आपके विचार आपकी भाषा से भी कई गुना अच्छे हैं. प्रणाम भैय्या . आपका अनुज कमलकांत सहाय ( लखनऊ )

Neelam ने कहा…

बेटी एक घर परिवार के लिए कितना महत्त्व रखती है ये मैं अच्छी तरह से जानती हूँ. मैं अपने तायाजी , पापा और चाचा की इकलौती बेटी हूँ. मेरे पांच भाई है. सब मुझे इतना चाहते हैं और प्यार करते हैं कि मैं ये सोच कर दहल उठती हूँ कि शादी के बाद ससुराल में मैं इनके बिना कैसे रह पाऊंगी. लेकिन आपकी इन पंक्तियों ने मेरा हौसला बढा दिया है .

हर घर की रौनक होती है बेटीयाँ
हर घर की शान होती है बेटीयाँ

खुद का घर छोड़कर
सभी अपनों को छोड़कर
दूसरों के घरों को
बसाती संभालती है बेटीयाँ

बेनामी ने कहा…

I can read and understand hindi but I can't write. I just love hindi poetry. I was just having a look on some blogs and suddenly I saw your this poem. This poem has really touched my heart. I salute you Sir. You desrve millions of thanks and congratulations from my bottom of heart. I love my daughetrs exactly as per your feelings of poems Sir. I will follow your blog regularly.
Hjakim Lalthan Singh
Lumding

sikandar ने कहा…

दुरुस्त फरमाया आपने की किस्मत वालों को मिलती है बेटीयाँ . औरत से ही जहां बना है लेकिन मर्द इस हकीकत को जानते हुए भी नहीं कुबूलता. औरत का दिल बहुत बड़ा होता है. उसमे सारे जहाँ की मौहब्बत बसती है. आपकी एक एक बात सौ फीसदी सही है. आपकी बेटीयाँ बहुत खुशनसीब है जिन्हें आप जैसा वालिद मिला है. अल्लाह आप पर मेहरबान रहे. आप आबाद रहे. शाद रहे.