मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

मेरी तरह चाहेगा कौन 

दूसरों की महफिलों में जानेवाले
मेरी नज़रों से तुम्हें देखेगा कौन

किसी और को दिल में बसाने वाले
मेरी  तरह से  तुझे  चाहेगा कौन

मुझ से बेखबर होकर सोनेवाले
मेरी तरह ख्वाबों में आयेगा कौन

मिल जायेंगे तुम्हें कई हमसफ़र लेकिन
मेरी तरह राहों में फूल बिछाएगा कौन

हर तरफ मौहब्बत के दुश्मन है फैले हुए
ज़माने की नज़रों से तुम्हें बचाएगा कौन

अनजाने लोग है  फरेब है हर मोड़ पर
ऐसे सफ़र में सही राह दिखायेगा कौन

आयेंगे तेरी महफिलों में सुखनवर बहुत अच्छे
"नाशाद"  की तरह लेकिन ग़ज़ल  पढ़ेगा कौन 

6 टिप्‍पणियां:

कमलेश वर्मा ने कहा…

BORA JI AAP TO HUM LOGON KO ANDER SE GAZAL KE JARIYE AUR UPAR SE APNE SUNDER VASTRON SE ANANDIT KAR RAHE HAIN ..AASHIRWAD KE LIYE AABHAR...SUNDER LEKHAN ...!!

sikandar ने कहा…

दूसरों की महफिलों में जानेवाले
मेरी नज़रों से तुम्हें देखेगा कौन

क्या खूब कहा . मेरी नज़रों से तुम्हें देखेगा कौन. सुभान अल्लाह .मर हवा

Neelam ने कहा…

जिसके दिल में इतनी मौहब्बत हो उसे कोई जुदा नासमझ ही होगा. टूट कर चाहने वाले कि जुबां से निकली आवाज है. बहुत सुन्दर नरेशजी. बहुत ही सुन्दर .

Gurminder Kaur ने कहा…

मुझ से बेखबर होकर सोनेवाले
मेरी तरह ख्वाबों में आयेगा कौन

बड़ा ही शानदार है.पढ़कर मज़ा आ गया.

awadhesh pratap ने कहा…

क्या जबरदस्त ग़ज़ल लिखी है . अगर कोई असली मौहबात नहीं समझे तो उसे इस तरह से कहना या भरे दिल से कहना. बहुत खूब भाईसाहब

Surya Vikramjeet ने कहा…

आयेंगे तेरी महफिलों में सुखनवर बहुत अच्छे
"नाशाद" की तरह लेकिन ग़ज़ल पढ़ेगा कौन
मैं आपका बहुत बड़ा या कहिये सबसे बड़ा फैन हूँ. आपका यह शेर आपकी हर रचना की पहचान होता है. मेरी नज़रों में तो ये हकीकत है कि आपसे अच्छा कोई नहीं.