रविवार, 9 मई 2010

यह कविता मेरी मम्मी के चरणों में अर्पित कर रहा हूँ. मेरी मम्मी जिनकी ऑंखें हम तीनों भाईयों के लिए सपने देखती हैं. जिनका दिल हमारे पूरे परिवार के लिए धडकता है. जिनकी मुस्कान हमें हर वक्त हिम्मत दिलाती है और यह कहती है कि जीवन में कभी हार मत स्वीकारना. जीतना ही जीवन है. 
     
              माँ 
इस धरती पर भगवान का रूप है माँ 
जीवन के इस सफ़र में ठंडी छाँव है माँ




  















माँ, दुखों की कड़ी धुप में
शीतलता का एहसास है
माँ, अगर हमारे पास है तो
सारे जहाँ की खुशीयाँ पास है

माँ के आँचल में जैसे
हर फूल की खुशबू है
माँ की गोद में जैसे
हर उलझन का हल है

माँ की मुस्कान में जैसे
खुदा खुद मुस्कुराता है
माँ के दुलार से जैसे
हर चमन में बहार है




















माँ की ममता से जैसे
सारी दुनिया पलती है
माँ की आँखों में जैसे
तीनों लोकों का ज्ञान है

इन आँखों में कभी आंसू ना आए
इन होठों से कभी मुस्कान ना जाए
इस आँचल पर कोई आंच ना आए
चाहे हमसे हर ख़ुशी छिन  जाए
माँ से दूर कभी कोई लाल ना जाए
चाहे सारी दुनिया से साथ छूट जाए


24 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

यह सच नरेशजी, माँ ही धरती पर भगवान का रूप है. भावपूर्ण कविता. बहुत सुन्दर. जब माँ साथ हो तो और कुछ नहीं चाहिये.

Unknown ने कहा…

भैय्या, हमें मदर डे एक दिन मनाने की जरुरत नहीं; रोज मनाना चाहिये. माँ का जीवन में योगदान इतना है कि एक दिन उनके नाम नहीं सारा जीवन उनके नाम हो. बहुत अच्छी कविता है.

36solutions ने कहा…

मातृत्‍व दिवस की शुभकामनाएं.

Unknown ने कहा…

मां इस धरा पर भगवान का स्वारूप है

Unknown ने कहा…

कहते हैं कि माँ का क़र्ज़ सात जन्मों तक नहीं उतरता. तो फिर माँ के नाम एक साल में केवल एक दिन!! कितनी बेतुकी बात है नरेशजी! हम प्रति दिन मातृ दिवस मनाएं.आपने कितना अच्छा लिखा है ---

माँ की ममता से जैसे
सारी दुनिया पलती है
माँ की आँखों में जैसे
तीनों लोकों का ज्ञान है

V Singh ने कहा…

माँ - एक ऐसा शब्द जो मुंह से निकलते ही सारे दर्द दूर कर देता है. आपने सही लिखा है भाईसाहब -
माँ, दुखों की कड़ी धुप में
शीतलता का एहसास है
माँ, अगर हमारे पास है तो
सारे जहाँ की खुशीयाँ पास है

Unknown ने कहा…

अगर जीते जी जन्नत का नजारा चाहिये तो माँ के पैरों की तरफ देख लो. अगर हर मुश्किल से छुटकारा पाना हो तो माँ के आंचल में सिर छुपा लो. नाशाद साहब एक एक लफ्ज माँ से करीबी में ही सुकून है; यह कहता है. आपकी अम्मीजान को हमारा भी सलाम जो उसने आप जैसा बेटा पैदा किया जो एक समन्दर से भी गहरा दिल रखता है.

लोकेन्द्र सिंह ने कहा…

उम्दा... माँ से बढकर दुनिया में है भी क्या....?

हिंदीब्लॉगजगत ने कहा…

बधाई.
अच्छा लिखा है आपने.
क्या हिंदी ब्लौगिंग के लिए कोई नीति बनानी चाहिए? देखिए

सुभाष नीरव ने कहा…

अच्छी कविता लगी माँ पर।

हरमहिंदर चहल ने कहा…

भाई नरेश जी, मां पर आपकी यह कविता अच्छी लगी।

virendra sharma ने कहा…

maa kaa saath umr bhar nahin miltaa
sundar prastuti .
veerubhaai 1947.blogspot .com

Unknown ने कहा…

माँ; माँ के बिना जीवन नहीं. माँ के बिना दुनिया नहीं. मैं आज जो भी हूँ मेरी माँ के कारण हूँ. आपकी कविता बहुत अच्छी लगी.

Unknown ने कहा…

बहुत अच्छी कविता है नरेशजी,.हर दिन माँ के नाम. हर दिन पिता के नाम. हमारी संस्कृति यही है. यही हमारे संस्कार होने चाहिये. हर रोज मत-पिता के दर्शन जीवन को सफल बनाते हैं.

Ra ने कहा…

माँ, दुखों की कड़ी धुप में
शीतलता का एहसास है
माँ, अगर हमारे पास है तो
सारे जहाँ की खुशीयाँ पास है

बहुत सुन्दर रचना ....माँ की ममता को प्रणाम .... दुनिया की हर माँ के चरणों में मेरा शत-शत-नमन

http://athaah.blogspot.com/

Unknown ने कहा…

मेरे लिए माँ ही सब कुछ है. मुझे माँ के बिना अपना वजूद नज़र ही नहीं आता है. आपकी कविता भी यही कहती है. बहुत अच्छी है आपकी कविता.

Unknown ने कहा…

My mom is sitting with me Nareshji. Everybody has read this poem. All are very emotional.
माँ की मुस्कान में जैसे
खुदा खुद मुस्कुराता है
माँ के दुलार से जैसे
हर चमन में बहार है
मेरी बीजी सबसे ग्रेट हैं. मेरे पापाजी भी ऐसे ही ग्रेट है. दोनों आपके लिए आशीर्वाद भेज रहे हैं इस कमेन्ट के साथ.नरेशजी , आपको भी a very memorable Mother's Day ( Mummy's Day ).

Unknown ने कहा…

बहुत बहुत बधाई नाशादजी, मदर डे पर इतनी अच्छी कविता के लिए. आपकी माँ को हम सबका प्रणाम.

इन आँखों में कभी आंसू ना आए
इन होठों से कभी मुस्कान ना जाए
इस आँचल पर कोई आंच ना आए
चाहे हमसे हर ख़ुशी छिन जाए
माँ से दूर कभी कोई लाल ना जाए
चाहे सारी दुनिया से साथ छूट जाए

Unknown ने कहा…

शानदार रचना है नरेश भैया. कोई भी अपने माँ-बाप को ना भुलाए और जैसा आपने लिखा है कि कोई दूर ना जाये. हर दिन माँ-बाप का दिन होता है. इनकी छत्रछाया रहे.

अनाम ने कहा…

मेरी ई-मेल आई डी नहीं है. बहुत मशक्कत के बाद टिप्पणी भेज पा रहा हूँ. नरेश बोहराजी, बहुत धन्यवाद इस कविता के लिए. दुनिया कि सभी माओं को हमारा प्रणाम पहुंचे. आपको एक बार फिर बधाई. इतनी अच्छी रचना के लिए. देवकरण झा , बेगुसराय

Unknown ने कहा…

आपकी मम्मी को भी मेरा प्रणाम और आपको बहुत बहुत थैंक्स इत्ती अच्छी कविता के लिए. आज कुछ और नहीं लिख सकती. बस आप समझ लो. माँ कुछ भरी हो चला है.

संजय भास्‍कर ने कहा…

..माँ की ममता को प्रणाम .

संजय भास्‍कर ने कहा…

माँ; माँ के बिना जीवन नहीं. माँ के बिना दुनिया नहीं

manjul ramdeo ने कहा…

माँ की ममता से जैसे
सारी दुनिया पलती है
माँ की आँखों में जैसे
तीनों लोकों का ज्ञान है
yeh lines bahut aachi h,esliye baghwan ne maa ka saath diya h..