शनिवार, 15 मई 2010
















आराधना

पहाडों के आँचल में ;
नदियों की कलकल में
पक्षियों की कलरव में ;
तारों की झिलमिल में
पलकों की छाँव में ; 
सपनों के गाँव में
शहरों की गलीयों में ;
यादों के बसेरों में
फूलों की कलियों में ;
सावन के झूलों में
डायरी के भरे पन्नों में ;
धुंधली होती तस्वीरों में
याद आती मुलाकातों में ;
भूलती हुई यादों में
कभी जो किए थे वादों में ;
अटल हमारे इरादों में

किसी को तलाश है तेरी
लौट आने की आस है तेरी
तुम बिन कोई आज भी अधूरा है
सूना किसी का बसेरा है







हर जगह तुझे कोई तलाशता है
हर दुआ में तुझे कोई मांगता है
हर रोज़ तेरी आराधना करता है
हर रोज़ तेरी तलाश करता है
लोग मुझे तेरी तलाश कहते हैं
लोग तुझे मेरी आराधना कहते हैं

17 टिप्‍पणियां:

Priyamwada Kanwar Sisodia ने कहा…

नरेश भाईसा; ये कविता मुझे बहुत ही अच्छी लगी है. कोई किसी का इंतज़ार कितनी बेकसी से कर रहा है ये आपने बहुत अच्छी तरह से शब्दों में ढाला है.

Aradhana ने कहा…

मैं आज बहुत खुश हूँ. आपकी कविता में मेरा जो नाम आया है और वो भी शीर्षक की जगह. नहीं ये तो केवल एक मजाक है; लेकिन आपकी कविता बेहद पसंद आई है.

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

अति सुन्दर...

sikandar ने कहा…

नाशाद साहब; क्या खूब लिखा है और क्या हसीं वादीयाँ लगने लगी है मुझे आज मेरे चारों ओर. मुझे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे आप भी कहीं मेरे आसपास बैठे ये कविता लिख रहे हो और मैं आपको देख नहीं पा रहा हूँ लेकिन महसूस कर रहा हूँ.

Nasir Maleehabadi ने कहा…

अरे हुज़ूर; क्या लिख रहे हो आप ! इस तरह से कोई किसी को चाहता है क्या आज के जमाने में? लेकिन आपने सच्ची मौहब्बत दिखलाई है इस कविता में. नाशाद साहब; बेहतरीन नज़्म है ये. मेरी बहुत शुभ-कामनाएं.

Farjaana Jahida ने कहा…

आपकी हर रचना बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है. बहुत अच्छा लिखते हैं आप. खुदा के लिए जारी रखियेगा; रोकियेगा नहीं.

Rani Khanna ने कहा…

अगर कोई इस तरह से किसी को चाहे और आराधना करे तो उसे वो जरुर मिलता / मिलती है. आपकी कविता बहुत ही सुन्दर और असरदार बन पड़ी है हमेशा की तरह.

हर जगह तुझे कोई तलाशता है
हर दुआ में तुझे कोई मांगता है
हर रोज़ तेरी आराधना करता है
हर रोज़ तेरी तलाश करता है
लोग मुझे तेरी तलाश कहते हैं
लोग तुझे मेरी आराधना कहते हैं

Yadwinder Singh ने कहा…

इन लाइनों में जबरदस्त जान है. अत्यंत ही सुन्दर.

कभी जो किए थे वादों में ;
अटल हमारे इरादों में
किसी को तलाश है तेरी
लौट आने की आस है तेरी
तुम बिन कोई आज भी अधूरा है
सूना किसी का बसेरा

दिलीप ने कहा…

bahut hi sundar kavita...

Kamalkant ने कहा…

आपकी इस कविता को मैंने पहले भी पढ़ा था जब आपने इसे पहले बार ब्लॉग पर पोस्ट किया था. आज भी जब पढ़ा तो बिलकुल नई लगी.इसका कारण है इसके शब्द. ये आपकी विशेषता बन गई है भैय्या. छोटे छोटे वाक्य जो बड़ी बड़ी बातें कह जाते हैं.

awadhesh pratap ने कहा…

हर तरह से सुन्दर. कभी कभी इंतज़ार इतना लम्बा क्यूँ होता है? धुंधली होती तस्वीरों में - ये पंक्ति सबसे असरदार लगी.

Kusum Rani Jha ने कहा…

बहुत सुन्दर और मन को मोहनेवाली रचना. आराधनाजी का खुश होना लाजमी है. आपकी कविता का शीर्षक ही उनके नाम से है.

Kumar Jaljala ने कहा…

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा

Surya Vikramjeet ने कहा…

आपकी इस रचना को दोबारा पढ़ा लेकिन फिर भी बहुत अच्छी लगी. आराधनाजी बहुत खुश हुई हैं कि उनके नाम से आपकी कविता का शीर्षक है. बहुत बधाई भाईसाहब.

संजय भास्कर ने कहा…

खूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है

संजय भास्कर ने कहा…

नाशाद साहब; क्या खूब लिखा है

Mehboob Iftekhaar "Mehboob" ने कहा…

जनाब; आपकी शायरी में बहुत दम है क्योंक आप हजरत दिल से लिखते हैं. खुदा आपको और अच्छा लिखने पर मजबूर करे. हमारी यही ख्वाहिश रहेगी. नाशाद साहब;आपको मुबारकबाद. हमारा सलाम.कुबूलें.