शनिवार, 29 मई 2010




















अब हमें चुप नहीं रहना है
अब हमें चुप नहीं रहना है
हम सब का यह कहना है
हम भारतीयों का यह कहना है



















जो भी नफरत फैला रहे हैं
उनको अब सबक सिखाना है
जो भी आपस में लड़ा रहे हैं
उनको बेनकाब अब करना है
जो भी गरीबों का खून चूस रहे हैं
उन्हें खून की कीमत बताना है
अब हमें चुप नहीं रहना है
हम सब  का यह कहना है
हम भारतीयों का यह कहना है


जो निर्दोषों को मार रहे हैं
उन्हें सूली पर चढ़ाना है
जो खून की नदीयाँ बहा रहे हैं
उन्हें गंगा का महत्व बताना है
जो मजहब को बदनाम कर रहे हैं
उन्हें मजहब का मतलब बताना है
जो नहीं समझते प्रेम की भाषा
उन्हें दूसरी भाषा में समझाना है
अब हमें चुप नहीं रहना है
हम सब का यह कहना है
हम भारतीयों का यह कहना है

जो धर्म के नाम पर लड़ा रहे है
जो जाति के नाम पर बाँट रहे हैं
जो बेहिसाब भ्रष्टाचार कर रहे हैं
जो देश की दौलत को खा रहे हैं
जो जनता को धोखा दे रहे हैं
उन सब को अब चेताना है
यह सब अब बंद करवाना है
हम सब का यह कहना है
हम भारतीयों का यह कहना है

इस देश की शान बढ़ाना है
इसे सबसे आगे ले जाना है
इसे एक मिसाल बनाना है
इसे फिर सोने की चिड़िया बनाना है
इसे फिर देवभूमि बनाना है
हम सब का यह कहना है
अब हमें चुप नहीं रहना है
हम भारतीयों का यह कहना है













जो भी गरीब का खाना छीन रहे हैं
जो देश की दौलत को लील रहे हैं
जो देश की अस्मिता से खेल रहे हैं
उन्हें असली जगह पर भेजना है
उन्हें उनकी औकात बताना है
उन्हें अपनी ताकत बताना है
अब हमें चुप नहीं रहना है
हम सब का यह कहना है
हम भारतीयों का यह कहना है
हम सब को अब एक हो जाना है

हमें धर्म के नाम पर नहीं लड़ना है
हमें जातियों में नहीं बंटना है
हमें प्रान्तों में नहीं बंटना है
हमें भाषाओं में नहीं बंटना है
हमें भारतवासी बनना है
हमें भारतवासी बनना है 


27 टिप्‍पणियां:

माधव( Madhav) ने कहा…

nice

Ra ने कहा…

कुछ बड़ी अवश्य है पर...सटीक है ...व्यर्थ कुछ भी नहीं ...आज की प्रत्येक समस्या पर प्रकाश डाला है ....समाज के हर वर्ग के लिए सन्देश देती आपकी ये रचना ...बड़ी जोशीली है सभी पंक्तिया धधकती हुयी है ....जयहिंद ....आपके लिए कुछ यहाँ भी है सुझाव दे

Azamat Hussain ने कहा…

आप ने बिलकुल सही फरमाया है. हमारे नेता और धर्म गुरुओं ने इस देश का बेडा गर्क किया है. ये दोनों हम हिन्दुस्तानीयों को आपस में लड़ाकर अपना अपना मकसद पूरा कर रहे हैं. अब हमें एक हो जाना चाहिये और आपस में मिलकर इन सभी को अपनी एकता बता देनी चाहिये वर्ना बहुत देर हो जायेगी. शुक्रिया नाशाद साहब.

Yadwinder Singh ने कहा…

आपकी कविता बड़ी जोशीली है लेकिन हम लोग इतनी आसानी से इनकी बातों में आ जाते हैं कि हर बार ये मुठ्ठी भर लोग लोग हम करोड़ों पर भरी पड़ते हैं. आपने सही समय पर कविता लिखी है अब समय वास्तव में आ गया है हम एक हो जाएँ. अब सारी हदें पार होती दिख रही है. नरेश प्राजी बड़ी जबरदस्त कविता है.

Unknown ने कहा…

एक नया रूप देखने को मिला आज आपका नरेशजी. आज के हालात पर आपकी कविता बहुत ही अर्थपूर्ण है.

Unknown ने कहा…

ये एक ऐसा सत्य है जो सब जानते हैं लेकिन फिर भी कभी आपस में एकता नहीं होती. क्या हम इतने कमजोर हैं कि थोड़े से लोगों के गुलाम हो गए हैं. आपके अनुसार मैं भी यही सोचती हूँ कि अगर अब सब एक न हुए तो हमारी आनेवाले पीढीयाँ हमें माफ़ नहीं करेगी. हमने सारे बंधन भूलकर एक होना पडेगा.

संजय भास्‍कर ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Unknown ने कहा…

नरेशजी यहाँ इंग्लैंड में आने के बाद मुझे ऐसा फील होता है कि हमारे भारत के नेता कितने करप्ट और बेशरम है. डेवलपमेंट का काम तो होता नहीं है सिर्फ लोगों को कास्ट और धर्म के नाम पर आपस में लड़ाते रहते हैं. हम लोग सबसे आगे निकलने की हिम्मत रखते हैं लेकिन आपस के झगड़ों में ही उलझ कर दुनिया में पिछड़ते जा रहे हैं. हमसे छोटे छोटे देश हमसे बहुत आगे जा चुके हैं. आपकी कविता से कुछ नहीं होनेवाला नरेशजी; आपसा सोचनेवाले बहुत कम गिनती में है और भड़काने और भड़कने वाले बहुत ही ज्यादा. फिर भी मैं दुआ करुँगी कि आपकी कविता का असर हो.

संजय भास्‍कर ने कहा…

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

Unknown ने कहा…

जनाब नाशाद साहब, सौ फीसदी सही है जो भी अपने लिखा. अज कश्मीर में वो ही हो रहा है जो पूरे हिन्दुस्तान में हो रहा है. यहाँ भी आपस में लडवाया जा रहा है. मजहब के नाम पर. पूरे मुल्क में क़त्ल-ए-आम मचा रखा है हमारे सियासतदानों और मजहब के ठेकेदारों ने. एक आम हिन्दुस्तानी ऐसा बिलकुल नहीं था इन लोगों की ही मेहरबानी है कि आज हम एक दूसरे के दुश्मन बन रहे हैं या बना दिए गए हैं. पहले मजहब ; फिर जाति और अब अलग अलग सूबे के नाम पर लड़ाया जा रहा है. ये हमारी कम अकली है कि हम लड़ते जा रहे हैं. कोई चमत्कार ही हम और हमारे मुल्क को बचा सकता है. अपने बहुत खूब लिखा है. सही बात लिखी है. अगर कोई समझना चाहे तो आसानी से समझ सकता है.

Surjeet Singh ने कहा…

बोहराजी;आजकल सही बात कोई नहीं सुनता. अच्छी बातें कहिये कोई ध्यान नहीं देगा. भड़काऊ भाषा बोलिए जनता भी सुनती है और मीडिया भी पूरे जोरशोर से प्रसारित करता है. अब हम क्या कहें? किस्से कहें? जब जनता ही सो रही है तो फिर किसे जगाएं.

Unknown ने कहा…

बहुत ही साफगोई से आपने लिखा है. मुझे बेहद पसंद आया. हर एक बात सच्ची है. अब यही एक रास्ता बचा है कि हम सब एकजुट होकर हाथ में हाथ लेकर खड़े हो जाएँ फिर देखें किसमे हिम्मत है जो हमारे मुल्क की तरफ आँख भी उठाकर देख सके. आपको बहुत शुभकामना ऐसी कविता के लिए.

Unknown ने कहा…

सभी का कच्चा चिठ्ठा खोल कर रख दिया है आपने. बहुत बहुत बधाई. आपकी इस जोशीली कविता ने हर एक को जोश से भर देना है.

Unknown ने कहा…

बिलकुल अलग तरह की कविता लिखी है आपने. हम ज्यादातर आपसे मौहब्बत और जुदाई पर ही लिखी हुई पढ़ते आए हैं. लेकिन नरेशजी; आप इसमें भी सफल रहे हो. एक जोश पैदा करनेवाली कविता है.

Unknown ने कहा…

बहुत अच्छी कविता. हर किसी के लिए प्रेरणादायक.

Unknown ने कहा…

भैय्या; हर तरफ यही आलम है. हर कोई यही कहता है कि सब गलत हो रहा है लेकिन जब सामना करने की बात आती है तो कोई सामने आने की हिम्मत नहीं दिखा पाता. ऐसा क्यूँ है? बेहद सुन्दर और सत्यता का आईना दिखा देने वाली कविता के लिए धन्यवाद.

Taukeer Ali Khan ने कहा…

मुल्क के भले के लिए यही जज्बा आज चाहिये. लेकिन पाता नहीं क्यूँ हर इंसान कमजोर होता जा रहा है. दुश्मनों को छोड़ आपस में ही लड़ रहे हैं और बंट रहे हैं.
नाशाद भाई आपने सच लिख कर दिखा दिया है कि अब शायद वक्त बदल रहा है और लोगों में फिर से एक बार एकता पैदा होने जा रही है. खुदा इस मुल्क को महफूज रखने में हम सबकी मदद करे.

Dayashankar Pandey ने कहा…

आपकी यह कविता सभी नेताओं और धर्म के तथाकथित ठेकेदारों को पढनी चाहिये. शायद अकल आ जाए. वैसे नरेश भैय्या मुझे तो नहीं लगाता कि ऐसे घटिया लोग इस कविता को पढेंगे.

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा और सार्थक रचना है !
बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
कुछ गलत जानकारी दी गयी है आपको मेरे बारे में..........हो सके तो दूर कर उपकार करें!

http://burabhala.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html

शिवम् मिश्रा ने कहा…

एक बेहद उम्दा और सार्थक रचना है !
बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
कुछ गलत जानकारी दी गयी है आपको मेरे बारे में..........हो सके तो दूर कर उपकार करें!

http://burabhala.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html

शिवम् मिश्रा ने कहा…

बेहद उम्दा रचना .................बहुत बहुत बधाइयाँ !!
मेरे बारे में कुछ गलत जानकारी उपलब्ध करवाई गयी है आपको कृपया नीचे दिए लिंक को देखे और फिर कोई राय बनाये |

http://burabhala.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

यादविंदर जी की टिपण्णी का अनुसरण करती हूँ ....

आपका अख्तर खान अकेला ने कहा…

aapne to aek dm 26 januari,15 agst kaaa maahol bnaa kr raashtrbhkti ka maahol bnaa diyaa bdhaai ho . akhtar khan akela kota rajasthan

Unknown ने कहा…

नरेशजी; ईमानदारी से प्रयास किये जाएँ तो कुछ भी असंभव नहीं है. आपकी कविता को अच्छी तरह समझ कर अगर कोई ईमानदारी से काम करे तो हर तरह से देश का विकास हो सकता है. हर मोर्चे पर सफलता प्राप्त कि जा सकती है. आपके प्रयास के लिए बहुत बधाईयाँ.

Unknown ने कहा…

आपको सलाम. आपने बहुत अच्छी कविता लिखी इसलिए. मेरा नया नया शौक है. वक्त कम मिलता है इसलिए कभी कभार ही सर्फिंग कर पाता हूँ. मेरी छोटी बहन वैशाली ने आपके ब्लॉग को पढने की सलाह दी. आता काही ही लिहण्याची गरज नहीं भाऊ. अप्रतिम आहे. वैशाली को भी थैंक्स. आपको तो जोशीली बधाई. ऐसी ही एक और लिखिएगा. बहुत अच्छा लगता है.

Unknown ने कहा…

हेल्लो सर. बहुत अच्छा पोएम लिखा है मैं अभी हिंदी सीखती हूँ. टाइपिंग अच्छा है. वर्ड्स थोडा खराब. हम कन्नड़ मूवी में एक्ट्रेस है. पोएट्री का बहुत इंटेरेस्ट. अच्छा लगा आपका थिंकिंग. congrats for such a beautiful peom sir. I love my India.

Unknown ने कहा…

हमारे सर कॅप्टन नाडकर्णी ने आपकी कविता पढ़कर सुनाई. बहुत अच्छी लगी. मैंने इसके बाद आपकी दो-तीन कवितायेँ और पढ़ी. आपकी भावनाएं बहुत अच्छी है. दिल के दर्द को आप बेहतर समझते हैं. मैं भी आपकी तरह राजस्थान से हूँ. आप मेरे बड़े भाई हो. मेरी बधाई स्वीकार करें और बस ऐसा ही सुन्दर लिखते रहें.