गुरुवार, 10 जून 2010

अब कुछ नहीं

जब बिखर गई सारी दुनिया
अब सिवाय पछतावे के कुछ नहीं

जब टूट गए सारे रिश्ते
अब सिवाय दूरीयों के कुछ नहीं

जब तिनके तिनके हुई उम्मीदें
अब सिवाय ख़्वाबों के कुछ नहीं

जब बिछुड़ गया कोई हमसे
अब सिवाय यादों के कुछ नहीं

जब दूर  हो गई सभी  आहटें
तो सिवाय सन्नाटों के कुछ नहीं

जब ओझल हो गई हैं मंजिलें
अब सिवाय सहरा के कुछ नहीं

जब जीवन से लम्बी हो गई राहें
अब सिवाय मोड़ों के कुछ नहीं

जब सूनी हो गई हैं सभी महफिलें
"नाशाद" सिवाय तनहाईयों के कुछ नहीं

15 टिप्‍पणियां:

Rani Khanna ने कहा…

रिश्ते टूटने का दर्द और किसी के बिछुड़ने की पीड़ा बहुत अच्छी तरह से झलकी है इस ग़ज़ल में. बहुत सुन्दर लिखी है आपने.

Aradhana ने कहा…

एक बहुत ही दर्द से भरी हुई और एक एक शब्द में दर्द को झलकाती हुई ग़ज़ल. अत्यंत ही सुन्दर.

Upasana Bohra ने कहा…

बहुत ही उम्दा --
जब जीवन से लम्बी हो गई राहें
अब सिवाय मोड़ों के कुछ नहीं

anandita thakur Singh ने कहा…

कुछ पंक्तियाँ तो बहुत ही अच्छी है. जैसे =
जब तिनके तिनके हुई उम्मीदें
अब सिवाय ख़्वाबों के कुछ नहीं

Capt Jeetendra Nadkarni ने कहा…

हर दिल अजीज ग़ज़ल. बस पढ़ते ही मेरी आँखें खुद ब खुद भीग गई. जब आंसू टपका तब पता चला.

sikandar ने कहा…

नाशाद साहब आपने सच लिख दिया है. जब बात पछतावे की हो तो एक एक बात तीर जैसी चुभती है. इस ग़ज़ल में जबरदस्त दर्द झलका है. आपका तो नाम ही नाशाद है.

Sheetal ने कहा…

इतना दर्द सहन नहीं होता. लेकिन फिर भी आपको बधाई क्यूंकि ग़ज़ल है तो लाजवाब.

Sweety Singh ने कहा…

नरेशजी; आप इतना मत रुलाया करें. आपके गीत बहुत अच्छे होते हैं. आप गीत या कवितायें ही लिखा करें. शुभ-कामनाएं तो दूंगी ही वर्ना आपने कोई गीत या कविता नहीं लिखी तो. अगला गीत ही होना चाहीय नहीं तो मैं नाराज़ हो जाऊंगी..

Priyamwafa Kanwar Sisodia ने कहा…

आपकी ग़ज़ल नि:संदेह बहुत ही शानदार ग़ज़ल है; दर्द तो बहुत है लेकिन फिर भी ये ज़िदगी का एक कड़वा सच है.

Niharika Choudhry ने कहा…

बेहतरीन ग़ज़ल .कुछ उदास सी. अल्फाज अपनी तरफ खींच लेते हैं.,

Neelam ने कहा…

सॉरी नरेशजी; एक लम्बे अरसे के बाद आपके ब्लॉग पर आई हूँ. आपकी रचनाएँ फुरसत से पढूंगी. आज वाली तो रुला गई. कोई इस तरह से गम ना महसूस करे.

Gurminder Kaur ने कहा…

बहुत अच्छी. लेकिन कहीं कहीं दर्द कुछ ज्यादा हो गया. लेकिन क्या करें कम हो या ज्यादा दर्द तो दर्द ही होता है.

Kamalkant ने कहा…

जब टूट गए सारे रिश्ते
अब सिवाय दूरीयों के कुछ नहीं **
यही सच्चाई है आज के ज़माने की. भैय्या आपने बहुत सच्ची बातें लिखी है. बहुत शानदार

संजय भास्कर ने कहा…

मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्कर ने कहा…

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।