शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

याद आऊँगा मैं 

जितना तुम भुलाना चाहो 
उतना ही याद आऊँगा मैं
सोने ना दूंगा चैन से कभी
तेरे हर ख्वाब में आऊँगा मैं

जब भी बहारें आयेंगी
हर फूल में नज़र आऊँगा मैं
सावन की भीगी फुहारों में
एक मीठी अगन लगाऊंगा मैं

चाहे जितनी राहें बदल लो
हर मोड़ पर नज़र आऊँगा मैं
चाहे अपना लो किसी गैर को
हर चेहरे में नज़र आऊँगा मैं

जब भी देखोगे तस्वीर मेरी
तुम्हारी साँसें मह्काऊँगा मैं
जब रातों में लेटोगे छत पर
चाँद में भी नज़र आऊँगा मैं

मौहब्बत की है मैंने तुमसे
तुम्हें ही अपनाऊँगा मैं
नहीं आसान "नाशाद" को भुलाना
हर सांस में याद आऊँगा मैं

16 टिप्‍पणियां:

कुन्नू सिंह ने कहा…

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pran sharma ने कहा…

AAPKE MAHFIL MEIN EK AUR ACHCHHEE
RACHNA.BADHAAEE

संजय भास्कर ने कहा…

सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

Sweety Singh ने कहा…

मौहब्बत की है मैंने तुमसे
तुम्हें ही अपनाऊँगा मैं
नहीं आसान "नाशाद" को भुलाना
हर सांस में याद आऊँगा मैं
Hi; Naresh!!! First of all all the best wishes from bottom of my heart. Its wonderfullll.
आपने बहुत बहुत चंगा लिखा है. हम लोग पंजाब को ; इंडिया को बहुत मिस करते हैं.आपके ब्लॉग के फोटोस देखकर तो आँखें भर आईं. हमने लन्दन बैठे बैठे इंडिया देख लिया. थंक यू जी वैरी मच

Kamalkant ने कहा…

जब भी देखोगे तस्वीर मेरी
तुम्हारी साँसें मह्काऊँगा मैं
जब रातों में लेटोगे छत पर
चाँद में भी नज़र आऊँगा मैं
बड़ा ही सुन्दर अलंकार है इन पंक्तियों में. आपकी एक और श्रेष्ठ रचना. बस भैया ऐसे ही लिखते रहीये. हमारी शुभ-कामनाएं हमेशा साथ है.

Rani ने कहा…

मौहब्बत की है मैंने तुमसे
तुम्हें ही अपनाऊँगा मैं
नहीं आसान "नाशाद" को भुलाना
हर सांस में याद आऊँगा मैं
आप किसी को दिल दें और वो आपको भुला दे. ऐसा तो नरेशजी हो ही नहीं सकता . आप इतना अच्छा लिखते हो. आपकी गज़ले और कवितायें पढ़ पढ़कर ही आपको अच्छी तरह से समझ सकता है. बहुत ही बहुत ही अच्छी लगी जी. हर मोड़ पर नज़र आने का आपका अंदाज़ दिल को छु गया.

Hjakim Lalthan Singh ने कहा…

Hi; so you are back with a another superb creation. Excellent Sir.

चाहे जितनी राहें बदल लो
हर मोड़ पर नज़र आऊँगा मैं

these are best lines.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

आदरणीय बोहरा जी, आपकी तीन रचनाएं पढ़ीं.
’याद आऊंगा मैं’ से
जब भी बहारें आयेंगी
हर फूल में नज़र आऊँगा मैं
सावन की भीगी फुहारों में
एक मीठी अगन लगाऊंगा मैं
ये पंक्तियां सबसे सुन्दर रहीं.
बधाई स्वीकार करें

Aradhana ने कहा…

सच्ची मौहब्बत करनेवाले ऐसे ही याद आया करते हैं. यादों में आकर तड़पाते हैं.

Sheetal ने कहा…

चाहे अपना लो किसी गैर को
हर चेहरे में नज़र आऊँगा मैं

आपने इतना अच्छा लिखा है कि कुछ भी लिखूं तो शायद वो नाकाफी होगा. बस मेरी शुभकामनाएं स्वीकारें और इसी तरह लिखते रहें.

Niharika Choudhry ने कहा…

जब भी देखोगे तस्वीर मेरी
तुम्हारी साँसें मह्काऊँगा मैं
जब रातों में लेटोगे छत पर
चाँद में भी नज़र आऊँगा मैं
यह पूरी ग़ज़ल इतनी ज़बरदस्त है कि इसकी तारीफ करने के लिए सही अल्फाज तलाशने होंगे. बहुत बहुत शुक्रिया

Vaishali Akolkar ने कहा…

चाहे जितनी राहें बदल लो
हर मोड़ पर नज़र आऊँगा मैं
आपकी रचनाओं में मौहब्बत की तमाम तरह की गहराइयां पढने की मिलती है.एक एक शब्द में मौहब्बत झलकती है. बहुत ही खूब.

Chandni ने कहा…

इसे कहते हैं सच्चा प्यार. सच्चा प्यार बहुत मुश्किल से और किस्मतवालों को ही मिलता है. आपकी ये ग़ज़ल भी बहुत खूबसूरत है.

Naseem ने कहा…

बेहद उम्दा भाईजान. आप ने बहुत अच्छा लिखा है

Varsha Dogra ने कहा…

ऐसी गज़लें लिखेंगे तो आप हमेशा याद रहोगे. रोजाना हम इंतज़ार करेंगे आपकी नई ग़ज़लों का / कविताओं का. लाज़वाब.

संजय भास्कर ने कहा…

अंदाज़ दिल को छु गया.