शनिवार, 24 अप्रैल 2010

महक गई हवा 


ना जाने किस की याद से महक गई हवा
मेरे आँचल  को  फिर  से  छेड़  गई हवा 


सावन की घटा को जैसे लेकर आती है हवा
पयाम फिर से किसी का लेकर आई है हवा


मैं भी थी गुमसुम   चुपचाप सी थी हवा 
ज़िक्र किसी का आते ही  मचल गई हवा


दिल था खोया खोया और कहीं गुम थी हवा
बेसाख्ता किसी की याद बन बहने लगी हवा


एक गाँव से  दूसरे  गाँव  तू  तो बहती है हवा 
मुझे भी अपने संग पी के गाँव उड़ा ले चल हवा 





26 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

sundar rachna...

awadhesh pratap ने कहा…

ना जाने किस की याद से महक गई हवा
मेरे आँचल को फिर से छेड़ गई हवा

प्रथम दोनों पंक्तियाँ ही इतनी बेहतर है कि रंग जम जाता है. अति सुन्दर कविता.

Neelam ने कहा…

बेसाख्ता किसी की याद बन बहने लगी हवा

Sweety Singh ने कहा…

की गल्ल है नरेश जी !! आप तो भौत ही सोणे गीत शीत लिखते हो जी. मैं संगीतकार बन जाऊं क्या !!!
I was just joking; but its a beautiful song flowing with air and fragarence of you.

Surya Vikramjeet ने कहा…

एक प्रेमिका की व्यथा उभर कर आती है और एक अनजानी सी तस्वीर सामने आ जाती है. धन्यवाद एक और अच्छी कविता के लिए.

Hjakim Lalthan Singh ने कहा…

very good Sir.

Gurminder Kaur ने कहा…

वाह वाह वाह . और एक वाह. मुझे बहुत पसंद आया.

Rani Khanna ने कहा…

मैं भी थी गुमसुम चुपचाप सी थी हवा
ज़िक्र किसी का आते ही मचल गई हवा
आपने बहुत ही अच्छा लिखा है. महक गई हवा. शीर्षक ही बहुत रोमांटिक है. बधाईयाँ नरेश जी.

sansadjee.com ने कहा…

ना जाने किसकी याद से महक गई हवा।
ना डॉक्टर का पता, न और कोई दवा।

बहुत ही अच्छी कविता।

रोहित ने कहा…

बहुत खूब!!!!!
बेहतरीन रचना!!!!

Sheetal ने कहा…

एक गाँव से दूसरे गाँव तू तो बहती है हवा
मुझे भी अपने संग पी के गाँव उदा ले चल हवा

हवा को नामाबर बनकर प्रेमिका ने जो पिया मिलन की गुहार लगाईं है वो बहुत सुन्दर बन पडी है. अच्छी कविता है.

Aradhana ने कहा…

तनहाइयां ; यादें , मिलने की चाह और हवा एकमात्र राह -- कितना सुन्दर बना है ये गीत.

Praneet Srivastav ने कहा…

खुबसूरत रचना के लिए बधाई.

Kusum Rani Jha ने कहा…

सावन की घटा को जैसे लेकर आती है हवा
पयाम फिर से किसी का लेकर आई है हवा

सावन में अपने पिया को याद करने का ज़िक्र हमारे लगभग हर प्रदेश ले लोकगीतों में मिलता है. आपने इस का बहुत सुन्दरता और सादगी से प्रयोग किया है. आपकी भाषा बहुत सरल है.बहुत अच्छा लगता है ऐसी भाषा पढ़कर.

N Ram ने कहा…

jabardast likhte hain aap janaab........

Kamalkant Sahay ने कहा…

ना जाने किस की याद से महक गई हवा

बहुत ही शानदार . अत्यंत ही प्रसंशनीय .

Kanchan Tiwari ने कहा…

आपकी कविता पहली बार पढ़ी और पढ़ते ही सारा माहौल महकने लगा. सच में बहुत सुन्दर प्रयास है और सफल प्रयास है. नीचे लिखी पंक्तियों ने मन को मोह लिया ...


दिल था खोया खोया और कहीं गुम थी हवा
बेसाख्ता किसी की याद बन बहने लगी हवा

Anupama ने कहा…

फैशन की दुनिया से जुडी हूँ लेकिन कविताओं का भी शौक है. आपकी कवितायें और ग़ज़लें पढ़ी बहुत अच्छी लगी. सरल भाषा होने के कारण बहुत जल्दी समझ में आ गई.

Sadhanaa ने कहा…

प्रेम में हवा का इतना अच्छा महत्त्व और इतनी अच्छी भूमिका ! बहुत मजा आया. अत्यंत सुन्दर रचना. धन्यवाद

Niharika Choudhry ने कहा…

कुछ दिन पहले पहली बार आपके ब्लॉग पर कुछ ग़ज़लें और कवितायें पढ़ी. आप अच्छा लिखते हो. इस ग़ज़ल की सबसे ख़ास बात है इसका यह शेर --
दिल था खोया खोया और कहीं गुम थी हवा
बेसाख्ता किसी की याद बन बहने लगी हवा
यह सच है कि किसी कि याद बनकर हवाएं बहती है. अगर शिद्दत से सोचें तो महसूस किया जा सकता है. बस बेपनाह मौहब्बत होनी चाहिये. शुक्रिया इस शानदार ग़ज़ल के लिए नाशाद जी.

Chandni ने कहा…

पूरी की पूरी ग़ज़ल ही महक रही है. अब इससे ज्यादा क्या लिखूं. बस मैं इसे पढ़ती जा रही हूँ.

सुरेश यादव ने कहा…

नरेश चन्द्र वोहरा जी ,आप के दिल में एक तड़प है जप शब्दों में बह कर निकलती है .लिखते रहिये बधाई.

Purnima Sareen ने कहा…

अत्यंत ही मनभावन लेखन है. एक लम्बे अरसे के बाद इतने सरल और भावनाओं से ओतप्रोत प्रेम-गीत पढने के लिए मिले हैं. आपका लेखन ऊंचे स्तर का है. असंख्य शुभ-कामनाएं.

Varsha Dogra ने कहा…

क्या खूब लिखा है -
ना जाने किस की याद से महक गई हवा
मेरे आँचल को फिर से छेड़ गई हवा

अपने महबूब की याद और हवा की छेडखानी. बेहद शानदार. हमारी दुआएं आप और भी अच्छा लिखें.

Teena Bhatt ने कहा…

जब किसी की याद आती है तो उसकी महक हवा के साथ हर तरफ फ़ैल ही जाती है. बहुत अच्छा लिखा है.

संजय भास्कर ने कहा…

. अत्यंत ही प्रसंशनीय .