शुक्रवार, 21 मई 2010





















भूली बिसरी यादें

नज़रों में तो था मगर दिल से दूर था
वो मेरा होकर भी कभी मेरा ना था

बे चराग गलियों में उसकी आवाजें तो थी
दरीचों से झाँका मगर गलियों में कोई न था

उसके जाने के बाद दिल तो बहुत रोया
मगर आंखों में उसकी एक आंसू ना था

दूर तलक फैले तो थे उसकी यादों के काले साये
मगर धूप का कहीं नाम ओ निशान तक ना था

घर के  हर कोने में गूँज रही थी  उसकी आहटें 
आँख खोली तो फकत तस्वीर में उसका चेहरा था 

अब ना वो कभी लौटेगा, रहेगी सिर्फ उसकी यादें
नाशाद, पर दिल रोज कहेगा वो हमसफ़र मेरा था 


14 टिप्‍पणियां:

Swarnalata Maheshwaree ने कहा…

पहला अवसर ये आपकी रचना पढने का. पहली बार में ही अत्यंत प्रभावित हुई हूँ आपकी लेखनी से. भावनाएं अच्छी हैं. बहुत बधाई नरेशजी आपको.

Rani Khanna ने कहा…

गज़ब की ग़ज़ल है. बहुत सुन्दर. दिल की गहराइयों से बधाई और शुभ-कामना.

घर के हर कोने में गूँज रही थी उसकी आहटें आँख खोली तो फकत तस्वीर में उसका चेहरा था

Sheetal ने कहा…

दूर तलक फैले थे उसकी यादों के साए. बस इस एक पंक्ति ने ही जान ला दी पूरी ग़ज़ल में. बहुत अच्छी ग़ज़ल.

Priyamwada Kanwar Sisodia ने कहा…

मुझे सबसे अच्चा ये शेर लगा -
उसके जाने के बाद दिल तो बहुत रोया
मगर आंखों में उसकी एक आंसू ना था

यूँ पूरी ग़ज़ल बहुत ही अच्छी है. घणी खम्मा

दिलीप ने कहा…

waah bahut khoob sir....

Swati Mehta ने कहा…

काफी अच्छी ग़ज़ल है. दिल रोज कहेगा वो हमसफ़र मेरा था.

Yadwinder Singh ने कहा…

बे चराग गलियों में उसकी आवाजें तो थी
दरीचों से झाँका मगर गलियों में कोई न था
क्या बात है. बहुत ही खूब.

Neelam ने कहा…

बहुत ही दर्द से भरी हुई ग़ज़ल है. आपने बहुत अच्छी लिखी है.

Aradhana ने कहा…

नरेशजी; सभी शेर बहुत अच्छे हैं. घर के हर कोने में गूँज रही थी उसकी आहटें .... इस शेर में एक अलग ही बात है.

Manjeet Kaur ने कहा…

Bahut achchi gazal. Bahut shubh-kamana.

Naseem Jahan ने कहा…

भाईजान, बहुत बढ़िया ग़ज़ल है. एक एक शेर को जैसे जैसे पढ़ती चली गई और उसमे खोती चली गई.

Sadhanaa ने कहा…

बेहद सुन्दर. अत्यंत ही मनभावन ग़ज़ल.

Sweety Singh ने कहा…

बहुत गहराई तक उतरने वाली ग़ज़ल. कान्ग्रेटस नाशाद जी ,

Sunanda Sharma ने कहा…

पुन: धन्यवाद और शुभ-कामना. आपकी रचना बहुत प्रशंसनीय है.