गुरुवार, 24 जून 2010

















                                कब आओगे साजना


बदरा बरसे
जियरा तरसे
कब आओगे साजना


सूनी अंखियाँ
सूनी रतियाँ
सुना है घर आंगना


पपीहा बोले
मन मोरा डोले
अब तो आजा साजना


पलकें बिछाए
राह निहारूं
सपनों में भी
मैं तुझे पुकारूं
अब तो सुन ले साजना




ये सावन भी
बीत ना जाए
अपना मिलन फिर
कब हो पाए
एक बार तो मिल जा साजना

14 टिप्‍पणियां:

माधव( Madhav) ने कहा…

बहुत अच्छी रचना

Unknown ने कहा…

क्या बात है नरेशजी! आजकल बड़े अलग तरह के गीत लिखे जा रहे हैं !! लेकिन कुछ भी हो मुझे तो ये गीत बहुत ही अच्छे लग रहे हैं. आपको एक बार फिर से बहुत बहुत बधाई. एक और ऐसा गीत पढने को मिले अब यही इंतज़ार है.

Unknown ने कहा…

इस गीत को पढने से पता है कैसा लगा !! जैसे विविध भारती पर सुगम संगीत के कार्यक्रम में कोई गीत बज रहा हो. सच में ये गीत बहुत ही अच्छा लिखा है आपने. किसी और को पसंद आये ना आये लेकिन मुझे बेहद पसंद आया है. तोहे पुकारूं भी बहुत अच्छा गीत था.

Unknown ने कहा…

सपनों में भी
मैं तुझे पुकारूं
अब तो सुन ले साजना
-- इस तरह की बातें ही आपकी विशेषता है नरेशजी. सुन्दर है ये रचना भी.

Unknown ने कहा…

सावन का मौसम आ रहा है और उस पर आपका यह बहुत ही मनभावन गीत सोने पे सुहागा है. अतिसुन्दर.

Unknown ने कहा…

छोटा सा लेकिन मधुर गीत. सावन का महीना अक्सर इस तरह के बिरह के गीतों को सुनने का मौसम होता है.
सूनी अंखियाँ
सूनी रतियाँ
सुना है घर आंगना

Unknown ने कहा…

यह रचना बड़ी अच्छी लगी. पपीहा बोले; मन मोरा डोले.

Unknown ने कहा…

नाशाद साहब; जैसे ही आपने हमारी मिजाजपुर्सी की; देखिये हमारी बीमारी काफूर हो गई. आपका रूतबा ही ऐसा है. आज तो आपने बड़ा ही शानदार गीत लिखा है. हर शब्द सावन के मौसम को याद करता हुआ लगता है.

Guruinderjeet Singh ने कहा…

आप अपनी एक अलग शैली बना रहे हो.ये बड़ी अच्छी बात है. शुरू शुरू में आपकी ग़ज़लें ज्यादा हुआ करती थी. बाद में कवितायेँ और नज्मे जुडी और अब गीत भी.. मैं बहुत से रचनाकारों को पढता हूँ लेकिन जो बात मुझे ज्यादा अच्छी लगी आपके ब्लॉग के बारे में वो यह है कि बाकी रचनाकारों को रचनाकार ही ज्यादा पढ़ रहे है और टिप्पणीयाँ लिख रहे हैं; जबकि आपके ब्लॉग पर शुद्ध पाठक ही ज्यादा है.ये एक बहुत अच्छी बात है. जितने शुद्ध पाठक ब्लॉग से जुड़ेंगे उतना ही साहित्य मजबूती से प्रगति करेगा. आपको बहुत बहुत बधाई और सुनहरे भविष्य के लिए ढेर सारी शुभ-कामनाएं. एक और विशेष बात गौर करने लायक है नरेशजी कि हमारे पंजाब के बहुत पाठक आपके ब्लॉग से जुड़े हुए हैं. इसमें कोई राज़ है क्या नरेशजी??

राजकुमार सोनी ने कहा…

अच्छा लिखा है आपने. आपको बधाई
सचमुच कुछ अनुभव तो मौसम के साथ ही जुड़ा रहता है।

Unknown ने कहा…

नरेश सा;( आप जोधपुर से हो इसीलिए ) आप बहुत अच्छे साहित्यकार हो. आपकी कवितायें ; ग़ज़लें सभी अच्छी होती है. ये तो मुझे बहुत अच्छी लगी. पपीहा बोले ; मन मोरा डोले ; अब तो आजा साजना. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है.

Unknown ने कहा…

बला की खुबसूरत रचनाएँ होती है आपकी. आपकी इसी रचना की एक लाइन पलकें बिछाए राह निहारूं ; बस अब तो आपकी रचनाओं का इसी तरह से हम इंतज़ार किया करेंगे.

Unknown ने कहा…

जनाब नाशाद साहब; आपका अंदाज़ बहुत ही जुदा है औरों से. आप अपने दिल में उठने वाले ख्यालों को जिस तरह से ग़ज़लों / नज्मों में ढालते हो वो बहुत अच्चा लगता है. मेरी तरफ से आपको बहुत शुभ-कामना. आगे और भी उम्दा पढने को मिलेगी इसी उम्मीद के साथ.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

भाई नरेशजी
कब आओगे साजना काव्य रचना पढ़ी …
अच्छा प्रयास है ।
सावन का आगमन अच्छा होने के शगुन हैं ।
बधाई !
शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं